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Showing posts from October, 2024

मोदी कॉलिंग पटेल एंड पटेल कॉलिंग नेहरू!

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  मोदी कॉलिंग पटेल एंड पटेल कॉलिंग नेहरू!                                        - -अरुण कुणाल सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर अक्सर नेहरू पर निशाना साधना एक राजनीतिक प्रवृत्ति बन गई है। हालांकि, इतिहास की दृष्टि से देखा जाए तो पटेल और नेहरू के बीच कई मुद्दों पर मतभेद होते थे, लेकिन उनके बीच एक गहरी समझ और परस्पर सम्मान भी था। पटेल ने कई मौकों पर नेहरू की नेतृत्व क्षमता की सराहना की थी और स्वतंत्र भारत के प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें उपयुक्त माना था। पटेल का कहना था कि नेहरू में वह वैश्विक दृष्टिकोण और दूरदर्शिता थी जो उस समय देश को दिशा दे सकती थी। यह कहना भी उचित है कि नेहरू और पटेल दोनों ने एक-दूसरे की क्षमताओं और सीमाओं को समझते हुए एक साथ काम किया, जिसमें पटेल ने नेहरू का समर्थन किया और देश की एकता के लिए योगदान दिया। दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत मतभेदों के बावजूद उनका उद्देश्य एक ही था - भारत का समग्र विकास और एकता। आज पटेल की विरासत को नेहरू के खिलाफ प्रस्तुत करना एक राजनीत...

"द लास्ट मुगल: द फॉल ऑफ ए डायनेस्टी"

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*द लास्ट मुगल: द फॉल ऑफ ए डायनेस्टी* (संदर्भ : झारखण्ड व बाघमारा विधानसभा चुनाव)                              - अरुण कुणाल  झारखंड की राजनीति में इस समय बड़े-बड़े खिलाड़ी मैदान में उतर चुके हैं। कोई अपने "वजीर" यानि प्रमुख नेताओं पर दांव लगा रहा है, तो कोई अपनी पूरी ताकत "प्यादों" पर लगा चुका है, जो अंत में निर्णायक साबित हो सकते हैं। और "घोड़े" की चाल, जो अप्रत्याशित और शक्तिशाली होती है, उसे लेकर आशंका है कि वही इस चुनाव में गेम-चेंजर साबित होंगे। शतरंज के इस खेल में, जिस तरह से एक गलत चाल पूरे खेल को पलट सकती है, उसी तरह एक छोटा लेकिन सही कदम सत्ता की बिसात को नए तरीके से सजा सकता है। बाघमारा की सियासी बिसात में दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है। यहां हर पार्टी और हर नेता अपनी रणनीति के साथ मैदान में है, लेकिन असल सवाल यही है कि बाघमारा का कौन वजीर, कौन प्यादा, और कौन घोड़ा है? धनबाद से सांसद बनने के बाद ढुल्लू महतो के खिलाफ एंटी-इनकम्बेंसी का माहौल बन रहा है, जिससे उनकी सियासी विरासत पर संकट आ सकता है।...