जीडीपी के अच्छे दिन :आंकड़ों की बाजीगरी या अडानी -अंबानी की ग्रोथ ही देश की ग्रोथ है?
जीडीपी के अच्छे दिन :आंकड़ों की बाजीगरी या अडानी -अंबानी की ग्रोथ ही देश की ग्रोथ है? लेखक – अरुण कुणाल भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर्ज की है। सरकार के लिए यह निश्चित रूप से जश्न मनाने का मौका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे असाधारण उपलब्धि बताते हुए कहा है कि वैश्विक अनिश्चितताओं, तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई चेन की चुनौतियों के बावजूद भारत ने यह रफ्तार हासिल की है। लेकिन सवाल यह नहीं है कि GDP 7.8 प्रतिशत बढ़ी या नहीं। सवाल यह है कि इस 7.8 प्रतिशत की वृद्धि का फायदा आम भारतीय की जिंदगी में कितना पहुंचा? जीडीपी देश की अर्थव्यवस्था का तापमान बताती है, लेकिन आम आदमी की आर्थिक हालत जानने के लिए सिर्फ थर्मामीटर देखना काफी नहीं है। इसलिए सवाल अडानी-अंबानी के बढ़ने पर आपत्ति का नहीं है। सवाल यह है कि क्या भारत की आर्थिक विकास यात्रा में अडानी-अंबानी के साथ वह करोड़ों भारतीय भी आगे बढ़ रहे हैं, जिनके नाम किसी कॉरपो...