खाड़ी युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट संकट : बिल्ली के भाग्य से छींका टूटने का इंतज़ार!
खाड़ी युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट संकट : बिल्ली के भाग्य से छींका टूटने का इंतज़ार! लेखक - अरुण कुणाल पश्चिम एशिया में जारी ईरान–इज़राइल संघर्ष ने केवल क्षेत्रीय स्थिरता को ही नहीं हिलाया, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाज़ार और कूटनीतिक समीकरणों को भी उलट-पुलट कर दिया है। इस उथल-पुथल के बीच भारत एक दिलचस्प स्थिति में खड़ा दिखाई देता है, जहां आपदा अवसर में बदलता हुआ नज़र आ रहा है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि अमेरिका और भारत सहित होर्मुज़ स्ट्रेट संकट से प्रभावित सभी देश “बिल्ली के भाग्य से छींका टूटने” का इंतज़ार कर रहे हैं। भारत-पाक युद्ध रुकवाने का दावा करने वाले डोनाल्ड ट्रम्प आज खुद सीज़फायर के लिए नरेंद्र मोदी और शहबाज़ शरीफ़ को फोन कर रहे हैं। ईरान ने युद्ध का हर्जाना और खाड़ी देशों से अमेरिकी मिलिट्री बेस हटाने की जो शर्तें रखी हैं, दूसरी ओर अमेरिकी दबाव के बावजूद इज़राइल की जंग जारी रखने की धमकी को देखते हुए निकट भविष्य में ट्रम्प साहब को शांति का नोबेल पुरस्कार मिलना मुश्क...