Posts

डिलिमिटेशन बिल पर नार्थ फर्स्ट बनाम साउथ फर्स्ट : क्या महिला आरक्षण की बोतल से निकलेगा परिसीमन का जिन्न?

Image
डिलिमिटेशन बिल पर नार्थ फर्स्ट बनाम साउथ फर्स्ट : क्या महिला आरक्षण की बोतल से निकलेगा परिसीमन का जिन्न?                              लेखक- अरुण कुणाल  भारतीय राजनीति में कई बार बड़े सुधार वन प्लस वन पैकेज के रूप में सामने आते हैं, जहां एक लोकप्रिय और व्यापक समर्थन वाले मुद्दे के साथ एक जटिल और विवादित विषय भी जोड़ दिया जाता है। आज महिला आरक्षण और डिलिमिटेशन का समीकरण कुछ ऐसा ही संकेत दे रहा है। महिला आरक्षण बिल के साथ डिलिमिटेशन ऑफर आधी आबादी के की राह में रोड़ा बन गया है! संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र के दौरान तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाने प्रस्तावित हैं, जो महिला आरक्षण के साथ -साथ भारत के प्रतिनिधित्व तंत्र को नया रूप दे सकते हैं। इन विधेयकों में संविधान (131वां संशोधन) बिल, परिसीमन बिल 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल शामिल हैं। महिला आरक्षण बिल , जिसे औपचारिक रूप से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ कहा जाता है, लंबे समय से लंबित एक ऐतिहासिक सुधार माना जा रहा है। संसद और विधानसभाओं में महिलाओ...

वेस्ट बंगाल चुनाव से पहले महिला आरक्षण पर संसद का विशेष सत्र: बंगाल की 'आधी आबादी' पर TMC और बीजेपी का ‘चुनावी ममता’!

Image
वेस्ट बंगाल चुनाव से पहले महिला आरक्षण पर संसद का विशेष सत्र: बंगाल की 'आधी आबादी' पर TMC और बीजेपी का ‘चुनावी ममता’!                           लेखक – अरुण कुणाल 16 अप्रैल से संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है, जिसमें महिला आरक्षण बिल और डिलिमिटेशन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित है। यह समय-चयन अपने आप में राजनीतिक संकेतों से भरा हुआ है, क्योंकि पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया अपने निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुकी है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है, क्या यह सत्र वास्तव में नीतिगत सुधार के लिए है, या फिर चुनावी रणनीति का एक सुनियोजित हिस्सा? विपक्ष की मांग थी कि यह विशेष सत्र पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद आयोजित किया जाए, ताकि इसे चुनावी प्रभाव से अलग रखा जा सके, लेकिन सत्ता पक्ष इस पर अड़ा रहा। जब देश की राजनीति में लगभग हर बड़ा निर्णय चुनावी गणित से प्रभावित होता है, तो बंगाल चुनाव के पहले चरण के मतदान से ठीक पहले महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे को संसद में लाना महज संयोग नहीं माना जा सकता। गौरतलब है ...

होर्मुज़ संकट पर इस्लामाबाद टॉक: अस्थायी राहत या स्थायी अनिश्चितता?

Image
  होर्मुज़ संकट पर इस्लामाबाद टॉक: अस्थायी राहत या स्थायी अनिश्चितता?                           लेखक - अरुण कुणाल पश्चिम एशिया में बीते 40 दिनों से जारी तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मोड़ आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की है, जिस पर ईरान और इज़राइल दोनों ने सहमति जताई है। 10-11 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों पक्षों की बैठक होगी, जिसकी मध्यस्थता पाकिस्तान कर रहा है! यह सीज़फायर ऐसे समय में आया है जब होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया था। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन को लेकर 40 दिनों तक जारी राष्ट्रीय शोक के आखिरी दिन सीज़फायर की घोषणा, यानी 40 दिन का युद्ध और 40 दिन का शोक, महज़ संयोग है या प्रयोग? गौरतलब है कि 28 फरवरी 2026 को अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद ईरान में 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया था। डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ संघर्ष विरा...

असम चुनाव में 'ज़ुबीन गर्ग फैक्टर' : बीजेपी का विजय रथ डिरेल होगा या जीत का लगेगा हैट्रिक?

Image
असम चुनाव में 'ज़ुबीन गर्ग फैक्टर' : बीजेपी का वि जय रथ डिरेल होगा या जीत का लगेगा हैट्रिक?                           लेखक – अरुण कुणाल असम विधानसभा चुनाव कई मायनों में दिलचस्प और बहुस्तरीय होता जा रहा है। एक ओर जहां हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में बीजेपी तीसरी बार सत्ता में वापसी की ओर बढ़ती दिख रही है! वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने भावनात्मक और राजनीतिक मुद्दों का ऐसा मिश्रण तैयार किया है, जो चुनावी समीकरणों को उलट भी सकता है। इस पूरे परिदृश्य में सबसे बड़ा ट्रम्प कार्ड ‘ज़ुबीन गर्ग फैक्टर’ है, जो पारंपरिक चुनावी गणित को चुनौती देता नजर आ रहा है। असम के तमाम चुनावी सर्वे के अनुसार मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में बीजेपी न केवल मजबूत स्थिति में है, बल्कि हैट्रिक लगाने जा रही है। सर्वे में बीजेपी और उसके सहयोगियों को विधानसभा की 126 सीटों में लगभग 90–98 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। तमाम सर्वे को गलत ठहराते हुए कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को असम की जिम्मेदारी देकर अपना सबकुछ झोंक दिया है। माना जा रहा है क...

डोनाल्ड ट्रम्प का एकतरफा सीजफायर, पीएम मोदी का "टीम इंडिया" का नारा : खाड़ी संकट को बिल्ली के भाग्य से छींका टूटने का इंतज़ार!

Image
डोनाल्ड ट्रम्प का एकतरफा सीजफायर, पीएम मोदी का "टीम इंडिया" का नारा  : खाड़ी संकट को बिल्ली के भाग्य से छींका टूटने का इंतज़ार!                              लेखक - अरुण कुणाल  पिछले एक माह से जारी ईरान–इज़राइल संघर्ष ने केवल क्षेत्रीय स्थिरता को ही नहीं हिलाया, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाज़ार और कूटनीतिक समीकरणों को भी उलट-पुलट कर दिया है। इस उथल-पुथल के बीच भारत एक दिलचस्प स्थिति में खड़ा दिखाई देता है, जहां आपदा अवसर में बदलता हुआ नज़र आ रहा है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि अमेरिका और भारत सहित होर्मुज़ स्ट्रेट संकट से प्रभावित तमाम देश “बिल्ली के भाग्य से छींका टूटने” का इंतज़ार कर रहे हैं। एक ओर डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर प्रस्ताव और शांति प्रयासों की चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी सेना अपनी सबसे प्रभावशाली और तेज प्रतिक्रिया देने वाली यूनिट्स में से एक 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के करीब 1,000 सैनिकों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भेजने की योजना बना रही है। यह कूटनीति और सैन्य तैयारी के उस दोहरे संतुलन को दर...

धुरंधर: द रिवेंज — मैजिक में लॉजिक नहीं होता!

Image
            धुरंधर: द रिवेंज — मैजिक में लॉजिक नहीं होता!                           लेखक: अरुण कुणाल स्पाई-थ्रिलर धुरंधर-2 ने सिनेमाघरों में दस्तक के साथ ही बॉक्स ऑफिस और फिल्म मेकिंग के पुराने पैमानों को चुनौती दे रहा है। फिल्म की भारी सफलता के चलते मुंबई के प्रतिष्ठित मराठा मंदिर सिनेमाघर में शाहरुख खान और काजोल की 30 साल से चल रही आइकॉनिक रोमांटिक ड्रामा फिल्म 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' के शो का पहली बार समय बदल दिया गया है! धुरंधर-2 ने ओपनिंग डे पर 145.55 करोड़ का शानदार कलेक्शन कर अबतक के सारे रिकार्ड्स तोड़ दिए है। करीब 3 घंटे 45 मिनट लंबी यह फिल्म दर्शकों को एक ऐसे सिनेमाई अनुभव में ले जाती है, जहां मनोरंजन और बहस दोनों साथ-साथ चलते हैं। दिलचस्प यह है कि इस फिल्म के लिए अब पारंपरिक फिल्म क्रिटिक्स की भूमिका सीमित होती दिख रही है! क्योंकि हर दर्शक खुद को एक समीक्षक मानकर थिएटर से बाहर निकल रहा है। फिल्म को लेकर सबसे बड़ा द्वंद्व “मैजिक बनाम लॉजिक” का है। एक वर्ग इसकी सिनेमैटिक भव्यता, ...

बीजेपी का महामहिम मुर्मू कार्ड और मिथुन का ममता को ICU की धमकी के बीच पश्चिम बंगाल चुनाव का शंखनाद : क्या ममता बनर्जी बचा पायेंगी अपना किला?

Image
बीजेपी का महामहिम मुर्मू कार्ड और मिथुन का ममता को ICU की धमकी के बीच पश्चिम बंगाल चुनाव का शंखनाद:     क्या ममता बनर्जी बचा पायेंगी अपना किला?                          लेo - अरुण कुणाल   पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनाव से पहले “खेला” शब्द महज एक नारा नहीं, बल्कि रणनीति, प्रतीक और मनोविज्ञान का हिस्सा बन चुका है। पिछले विधानसभा चुनाव में “खेला होबे” के नारे ने जिस तरह सियासी माहौल को गर्म किया था, उसी तरह एक बार फिर चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही बंगाल की राजनीति में बयान, प्रतीक और पहचान की राजनीति तेज हो गई है।  बंगाल में चुनावी राजनीति का इतिहास बताता है कि यहां चुनाव से काफी पहले ही माहौल गर्म हो जाता है। बयानबाजी, आरोप-प्रत्यारोप और प्रतीकों की राजनीति इस प्रक्रिया का हिस्सा बन जाती है। इस बार सियासी बहस के केंद्र में घुसपैठ, SIR का मुद्दा, बीजेपी का “महामहिम मुर्मू कार्ड” और मिथुन चक्रवर्ती का ममता बनर्जी को लेकर दिया गया “ICU” वाला विवादित बयान जैसे बड़े मुद्दे हैं, जिन पर तृणमूल कांग्...