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अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में नहीं चला 'ट्रम्प कार्ड' : बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रम्प के बाद अब किसकी बारी...?

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अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में नहीं चला 'ट्रम्प कार्ड' :    बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रम्प के बाद अब किसकी बारी...?                            लेखक : अरुण कुणाल 3 नवंबर डोनाल्ड ट्रम्प के लिए 'तीन तिगाड़ा, काम बिगाड़ा' साबित हुआ! संविधान बदलकर तीसरी बार राष्ट्रपति बनने का सपना देखने वाले ट्रम्प साहब को अमेरिकी मतदाताओं ने बड़ा झटका दिया है। इस हार को वे अपनी व्यक्तिगत हार मानने से इनकार कर रहे हैं, लेकिन चुनाव परिणामों ने उनकी लोकप्रियता और राजनीतिक पकड़ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसका भारत के प्रति अमेरिकी नीति पर क्या असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में पता चलेगा, लेकिन ट्रम्प की हार पर अमेरिका के साथ-साथ भारत में भी खुशी देखने को मिल रही है। दुनिया के दो सबसे महंगे चुनावों में अरबों डॉलर खर्च हुए और दोनों के नतीजों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। इजराइल में बेंजामिन नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत से दूर रह गया, तो अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी ने कांग्रेस के दोनों सदनों पर अ...

रामलीला मैदान में विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन: मोदी सत्ता का 'वोट चोरी' से 'परिसीमन' तक गोलपोस्ट बदलने की तैयारी!

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रामलीला मैदान में विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन: मोदी सत्ता का 'वोट चोरी' से 'परिसीमन' तक गोलपोस्ट बदलने की तैयारी!                            लेखक -अरुण कुणाल  चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में इंडिया गठबंधन ने दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में महारैली का आयोजन किया। इस रैली के जरिए विपक्षी दलों ने न सिर्फ चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए, बल्कि केंद्र की मोदी सरकार पर भी सीधा राजनीतिक हमला बोला। सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, ममता बनर्जी, राहुल गांधी, अखिलेश यादव, फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, तेजस्वी यादव, हेमंत सोरेन और प्रियंका गांधी समेत विपक्ष के तमाम बड़े नेताओं की मौजूदगी ने इसे एक बड़े शक्ति प्रदर्शन का रूप दिया। महारैली से पहले राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्षी दलों के नेताओं, कार्यकर्ताओं और चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में मृत घोषित किए गए लोगों ने मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक मार्च निकाला। लगभग दो किलोमीटर लंबे इस मार्च में भारी संख्या म...

दिल्ली छावनी में तब्दील : ममता बनर्जी, केजरीवाल समेत कई नेता हिरासत में! कॉकरोचों के लिए जंतर-मंतर अब दूर नहीं? राहुल गांधी की शतरंज वाली ‘कैसलिंग’ चाल और जनांदोलन का खतरा

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दिल्ली छावनी में तब्दील : ममता बनर्जी, केजरीवाल समेत कई नेता हिरासत में! कॉकरोचों के लिए जंतर-मंतर अब दूर नहीं?  राहुल गांधी की शतरंज वाली ‘कैसलिंग’ चाल और जनांदोलन का खतरा                          लेखक - अरुण कुणाल दिल्ली सात बार उजड़ी और बसी है। उस दिल्ली की न हवा दिल्ली की है, न पानी दिल्ली का, न मौसम दिल्ली का और न ही लोग दिल्ली के! देश के कोने-कोने से युवा यहां पढ़ने, रोजगार तलाशने और अपने सपनों को पूरा करने आते हैं। ऐसे में दिल्ली आने वाले युवाओं पर पाबंदियां लगाकर सरकार आखिर क्या हासिल करना चाहती है? सवाल सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध के अधिकार का भी है। इमरजेंसी के दौर में भी इंदिरा गांधी ने ट्रेनों के पहिए नहीं रोके थे। उलटे, कहा जाता है कि लेट चलने वाली ट्रेनें भी समय पर चलने लगी थीं! लेकिन दिल्ली में युवाओं को रोकने के लिए मोदी सरकार की ट्रेनें रोकने की रणनीति भी नाकाम होती दिख रही है। लगता है, युवाओं को सरकार के इस कदम का पहले से ही अंदाज़ा था, तभी वे दो दिन पहले ही दिल्ल...

गांधी के देश में सत्याग्रह पर रोक : जंतर-मंतर और शिवाजी पार्क में Gen-Z की गांधीगिरी!

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गांधी के देश में सत्याग्रह पर रोक : जंतर-मंतर और शिवाजी पार्क में Gen-Z की गांधीगिरी!                           लेखक — अरुण कुणाल आज गांधी जयंती पर एक तरफ देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को नमन कर रहा है, दूसरी तरफ दिल्ली के जंतर-मंतर और मुंबई के शिवाजी पार्क से लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर उठती आवाजें देश का ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं। सवाल चुनाव आयोग, मतदाता सूची और SIR को लेकर हैं। सवाल यह भी है कि जिस देश ने सत्याग्रह के रास्ते अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी थी, उसी देश में आज अपने मताधिकार को लेकर सवाल उठाने के लिए युवाओं को सड़क पर उतरना पड़ रहा है।  दिल्ली में विपक्ष के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र समूहों ने गांधी जयंती पर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था। पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों के जुटने की खबर आई और करीब 1,000 लोगों को हिरासत में लिए जाने की रिपोर्ट सामने आई। इनमें दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी मार्लेना, सामाजिक कार्यकर्ता योग...

अब न सड़कें सुनी होंगी, न चुनाव आयोग आवारा : गांधी जयंती पर 'ज्ञानादेश' के खिलाफ पूरे देश को जंतर-मंतर में तब्दील करने का ऐलान!

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  अब न सड़कें सुनी होंगी, न चुनाव आयोग आवारा : गांधी जयंती पर 'ज्ञानादेश' के खिलाफ पूरे देश को जंतर-मंतर में तब्दील करने का ऐलान!                          लेखक — अरुण कुणाल लोकतंत्र के लिए इससे बुरा क्या हो सकता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कानपुर स्थित घर के बाहर किसी ने ‘गद्दार’ लिख दिया! इस तस्वीर को देखकर फिल्म चक दे इंडिया का वह सीन याद आ गया, जब पाकिस्तान से हार के बाद कबीर खान (शाहरुख खान) के घर की दीवार पर कोई ‘गद्दार’ लिख देता है! हालांकि, फिल्म के अंत में महिला हॉकी टीम के कोच के रूप में भारत को वर्ल्ड कप जिताने के बाद एक बच्चा उस लिखे शब्द को मिटा देता है!  ऐसे में मन में सवाल उठता है कि क्या ज्ञानेश कुमार के लिए भी कोई बच्चा ऐसा करेगा, जो ‘वोट चोरी’ के खिलाफ पुलिस की लाठी खाने और जेल जाने तक को तैयार है? क्या ज्ञानेश कुमार उस 18 साल के युवा को हीरो बना पाएंगे, जिसका वोट SSR के तहत पिछले दो वर्षों से नहीं बन पा रहा है? क्योंकि मुद्दा सिर्फ दीवार पर लिखे ‘गद्दार’ शब्द का नहीं है। असली सवाल ...

कतरास की प्राणवायु पचगढ़ी बाजार वेंटिलेटर पर : गजलीटांड त्रासदी की 31वीं बरसी और कतरास -पचगढ़ी पर विस्थापन का खतरा!

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कतरास की प्राणवायु पचगढ़ी बाजार वेंटिलेटर पर:  गजलीटांड त्रासदी की 31वीं बरसी और कतरास-पचगढ़ी पर विस्थापन का खतरा!                         लेखक — अरुण कुणाल धनबाद के लिए 26 सितंबर की तारीख कभी न भर पाने वाला वह ज़ख्म है, जिससे आज भी खून रिस रहा है। 26 सितंबर 1995 की रात गजलीटांड की खदान नंबर-6 में आई भयानक आपदा में 64 खनिकों की जान चली गई थी। 1975 की चासनाला दुर्घटना के बाद यह भारत के इतिहास की सबसे भीषण खनन आपदाओं में से एक थी, जिसने धनबाद से लेकर दिल्ली तक को हिला कर रख दिया था। तीन दिनों तक लगातार हुई मूसलाधार बारिश के कारण खदान के पास बहने वाली कतरी नदी का जलस्तर बढ़ गया था और नदी का बेकाबू पानी सीधे गजलीटांड की खदान नंबर-6 में समा गया। आधिकारिक तौर पर 64 मजदूरों की जलसमाधि हुई थी, जबकि आसपास की खानों को मिलाकर मृतकों का आंकड़ा 79 तक पहुंच गया था। मुझे आज भी अच्छी तरह याद है, हर रोज सुबह से शाम तक वहां लोगों का जमघट लगा रहता था। हम हर दिन इस उम्मीद में जाते थे कि शायद आज कुछ मजदूरों का पता चल जाए। लेकिन जब इं...

ब्रिक्स पर डोनाल्ड ट्रंप का साया : तस्वीर और बयानों में जो दिखा, दिल्ली डिक्लेरेशन में गायब!

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ब्रिक्स पर डोनाल्ड ट्रंप का साया : तस्वीर और बयानों में जो दिखा, दिल्ली डिक्लेरेशन में गायब!                           लेखक – अरुण कुणाल नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का मंच सजा तो दुनिया की निगाहें भारत पर टिक गईं। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात ने वैश्विक राजनीति को एक नई तस्वीर दी, तो दूसरी तरफ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की मौजूदगी ने इस मंच को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया। लेकिन इस पूरी तस्वीर में एक ऐसा चेहरा मौजूद नहीं था, जिसकी परछाईं पूरे सम्मेलन पर साफ दिखाई दे रही थी! जी हाँ, हम बात कर रहे हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की। सम्मेलन ऐसे समय में हुआ जब दुनिया तेजी से बदलते भू-राजनीतिक और आर्थिक समीकरणों से गुजर रही है। व्यापारिक तनाव, एकतरफा शुल्क, क्षेत्रीय संघर्ष और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में बढ़ती अनिश्चितता के बीच ब्रिक्स ने बहुपक्षीय सहयोग और वैश्विक दक्षिण की भूमिका को मजबूत करने का संदेश देने की कोशिश की...