खाड़ी युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट संकट : बिल्ली के भाग्य से छींका टूटने का इंतज़ार!
खाड़ी युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट संकट : बिल्ली के भाग्य से छींका टूटने का इंतज़ार! लेखक - अरुण कुणाल ईरान–इज़राइल संघर्ष के 23 दिन बाद संसद में पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा यह स्वीकार करना कि खाड़ी संकट भविष्य में कोविड जैसी चुनौती बन सकता है, और उसके बाद सर्वदलीय बैठक करना, एक महत्वपूर्ण संकेत देता है। यह दर्शाता है कि सरकार इस खतरे को केवल सैन्य संघर्ष के रूप में नहीं, बल्कि एक बहुआयामी आर्थिक-सामाजिक संकट के रूप में देख रही है। अगर खाड़ी संकट सच में कोविड जैसी व्यापक चुनौती बनता है, तो भारत के लिए असली परीक्षा तब होगी जब उसे ऊर्जा, अर्थव्यवस्था और कूटनीति के बीच संतुलन बनाना मुश्किल पड़ेगा। पश्चिम एशिया में जारी ईरान–इज़राइल संघर्ष ने केवल क्षेत्रीय स्थिरता को ही नहीं हिलाया, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाज़ार और कूटनीतिक समीकरणों को भी उलट-पुलट कर दिया है। इस उथल-पुथल के बीच भारत एक दिलचस्प स्थिति में खड़ा दिखाई देता है, जहां संकट, अवसर में बदलता हुआ नजर आ रहा है। बेंजामिन नेतन्याहू ...