लोकतंत्र के ढहते स्तंभों के बीच सत्याग्रह की बदलती गूंज: अन्ना हज़ारे से सोनम वांगचुक तक गांधीवादी सत्याग्रह की प्रासंगिकता!
लोकतंत्र के ढहते स्तंभों के बीच सत्याग्रह की बदलती गूंज: अन्ना हज़ारे से सोनम वांगचुक तक गांधीवादी सत्याग्रह की प्रासंगिकता! लेखक - अरुण कुणाल सोनम वांगचुक को अधिकांश लोग "3 इडियट्स" फिल्म के प्रेरणा स्रोत के रूप में जानते हैं, लेकिन उनका वास्तविक परिचय लद्दाख के पर्यावरण, संस्कृति और स्थानीय समुदायों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में है। इस संघर्ष के दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा। आज वे लद्दाख से दिल्ली आकर युवाओं के राष्ट्रीय आंदोलन का न केवल अन्ना हज़ारे की तरह प्रमुख चेहरा हैं, बल्कि गांधीवादी सत्याग्रह की एक चलती-फिरती प्रयोगशाला भी बन चुके हैं। भारतीय लोकतंत्र में अनशन केवल विरोध का माध्यम नहीं, बल्कि नैतिक शक्ति का प्रतीक रहा है। महात्मा गांधी ने सत्याग्रह और उपवास को सत्ता के विरुद्ध संघर्ष का ऐसा हथियार बनाया, जिसमें हिंसा नहीं, बल्कि आत्मबल और जनमत की ताकत होती है। स्वतंत्र भारत में यदि किसी अनशन ने राष्ट्रीय राजनीति को सबसे अधिक प्रभ...