बीजेपी का "मगध" फतह : नीतीश का "शिंदेकरण" या "धनखड़ीकरण"?
बीजेपी का "मगध" फतह : नीतीश का "शिंदेकरण" या "धनखड़ीकरण"? लेखक – अरुण कुणाल कभी नरेंद्र मोदी ने नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा था कि नीतीश ने उनके आगे से खाने की थाली छीन ली थी। उस थाली की कीमत मुख्यमंत्री की कुर्सी होगी, यह तो नीतीश बाबू ने सपने में भी नहीं सोचा होगा। बिहार चुनाव के बाद नीतीश कुमार आईना साफ करते रह गए और जिस चेहरे पर मगध की लड़ाई लड़ी गई थी, उसी चेहरे को ‘मो’शा’ ने बदल दिया। बिहार चुनाव के समय नारा लगा था — “25 से 30 फिर से नीतीश।” लेकिन तीन महीने बाद ही बहादुर शाह ज़फ़र का मशहूर शेर याद आ गया! कल कहीं "बिहार के ज़फ़र" न कह दें —कितना है बद-नसीब ‘नीतीश’ राज करने के लिए, दो साल भी न मिली कू-ए-बिहार में… भारतीय राजनीति में सत्ता परिवर्तन कभी भी केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं होता, वह रणनीति, समय-निर्धारण और शक्ति-संतुलन का परिणाम होता है। बिहार की मौजूदा सियासत भी इसी तरह के एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है। यदि हाल के घटनाक्रमों को जोड़कर देखा ज...