धनबाद मेयर चुनाव राजनीतिक का नया प्रयोगशाला: झरिया और बाघमारा के बीच शक्ति -संतुलन की निर्णायक जंग!
धनबाद मेयर चुनाव राजनीतिक का नया प्रयोगशाला: झरिया और बाघमारा के बीच शक्ति -संतुलन की निर्णायक जंग! लेखक - अरुण कुणाल झारखण्ड निकाय चुनाव का शोर थम चुका है, पर सियासत की सरगर्मी अभी बाकी है। प्रचार का औपचारिक दौर खत्म हो गया है और मुकाबला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। धनबाद की फिज़ा में भाषणों और नारों की गूंज भले ही शांत हो गई हो, लेकिन सत्ता की असली जंग अब परदे के पीछे लड़ी जा रही है। जनसंपर्क की जगह धनबल की खामोश हलचल आज देर रात तक जारी रहने की संभावना है और उसकी फुसफुसाहट बूथ स्तर तक साफ़ सुनाई दे रही है। एक दौर था जब ‘मिनी बम्बई’ कहलाने वाला धनबाद सचमुच दौलत की रफ़्तार से पहचाना जाता था! कहा जाता था, यहाँ पैसा हवा में उड़ता है। वक्त बदला, कोयले की चमक फीकी पड़ी, धंधा-पानी पहले जैसा नहीं रहा। लेकिन विडंबना देखिए, रोज़गार की रफ्तार भले थम गई हो, चुनावी मौसम आते ही नोटों की उड़ान आज भी आसमान छूने लगती है। धनबाद की फिज़ा में अब उद्योगों की गूंज कम है, पर चुनाव के दिनों में ‘उड़ता ...