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Showing posts from March, 2026

बीजेपी का "मगध" फतह नीतीश का "शिंदेकरण" या "धनखड़ीकरण"?

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बीजेपी का "मगध" फतह   नीतीश का "शिंदेकरण" या "धनखड़ीकरण"?                              लेखक – अरुण कुणाल भारतीय राजनीति में सत्ता परिवर्तन कभी भी केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं होता, वह रणनीति, समय-निर्धारण और शक्ति-संतुलन का परिणाम होता है। बिहार की मौजूदा सियासत भी इसी तरह के एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है। यदि हाल के घटनाक्रमों को जोड़कर देखा जाए तो ऐसा लगता है कि भारतीय जनता पार्टी का वर्षों पुराना ‘मगध फतह’ का सपना अब साकार होने की दिशा में बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है और इस संभावना को मजबूत कर दिया है कि राज्य में पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बन सकता है। नीतीश कुमार बिहार की राजनीति के ऐसे नेता रहे हैं जिन्होंने तीन दशकों से अधिक समय तक सत्ता और विपक्ष दोनों में रहकर अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखी। लेकिन राजनीति का स्वभाव ही ऐसा है कि समय के साथ समीकरण बदलते रहते हैं। यदि वास्तव में उन्हें राज्यसभा भेजा जात...

खाड़ी क्षेत्र का संकट : जियो-पॉलिटिक्स, तेल का खेल और भारत की मौन कूटनीति की दुविधा!

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  खाड़ी क्षेत्र का संकट : जियो-पॉलिटिक्स, तेल का खेल और भारत की मौन कूटनीति की दुविधा!                             लेखक - अरुण कुणाल  पश्चिम एशिया एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठा है। ईरान, इज़रायल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तेज़ी से बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता तनाव अब सिर्फ दो देशों के बीच का झगड़ा नहीं रहा। ईरान, इज़रायल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच टकराव ने पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर दिया है। इस समूचे परिदृश्य में भारत एक जटिल कूटनीतिक दुविधा के केंद्र में खड़ा है। युद्ध की आग अब भारत के दरवाज़े तक पहुँच चुकी है। हिन्द महासागर में ईरानी युद्धपोत के डूबने को सिर्फ़ युद्ध जनित कार्रवाई कहकर टाल देना भारत की रणनीतिक भूल होगी। अमेरिका ने भारत के इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में भाग लेकर लौटते हुए सिर्फ़ एक ईरानी जहाज़ को नहीं, भारत की प्रतिष्ठा को निशाना बनाया है। इस मुद्दे पर भारत की ख़ामोशी कूटनीति नहीं, बल्कि मौन सहमति मानी जाएगी। ईरान–इज़रायल–अमेरिक...