पिनराई विजयन : द लास्ट कॉमरेड ऑफ़ लेफ्ट मुक्त भारत!
पिनराई विजयन : द लास्ट कॉमरेड ऑफ़ लेफ्ट मुक्त भारत! लेखक – अरुण कुणाल भारतीय राजनीति के लंबे और उतार-चढ़ाव भरे इतिहास में वामपंथ एक समय वैचारिक दृढ़ता, संगठनात्मक अनुशासन और जन-आंदोलनों की शक्ति का पर्याय हुआ करता था। लेकिन समय के साथ बदलते राजनीतिक समीकरणों, सामाजिक आकांक्षाओं और नेतृत्वगत निर्णयों ने इस धारा को सीमित कर दिया। आज जब हम केरल की राजनीति को देखते हैं, तो पिनराई विजयन एक ऐसे नेता के रूप में उभरते हैं, जो न केवल अपने राज्य में वामपंथ की अंतिम मज़बूत कड़ी हैं, बल्कि एक युग के समाप्त होने के प्रतीक भी बनते जा रहे हैं। केरल को लंबे समय तक वामपंथ का गढ़ माना जाता रहा है। यहां की राजनीतिक चेतना, शिक्षा का स्तर और सामाजिक विकास ने वामपंथी विचारधारा को गहराई से जड़ें जमाने का अवसर दिया। लेकिन हाल के वर्षों में राष्ट्रीय राजनीति में जो बदलाव आया है, उसका प्रभाव केरल पर भी धीरे-धीरे दिखने लगा है। यदि यह कहा जाए कि केरल वामपंथ का आख़िरी किला है, तो यह अतिशयोक्ति नहीं हो...