इरफान खान
लॉकडाउन की वजह से अपनी मां की अंतिम यात्रा में शरीक नहीं हो पाए इरफ़ान खान को जब दो साल पहले अपनी बीमारी का पता चला था, तो अपने फ़ैन के साथ ख़ुद ख़बर शेयर करते हुए कहा था- "मुझे यकीन है कि मैं हार चुका हूँ....”
अपने ज़िंदादिल अदा के लिए मशहूर इरफान खान कैंसर से जंग हार गए! आज वो हमारे बीच नहीं रहे पर उनके ज़िंदादिली का एक क़िस्सा आज शेयर करना चाहूँगा!
यूँ तो इरफ़ान खान की कई फ़िल्मों का PR और प्रमोशन किया है पर 'पान सिंह तोमर’ फ़िल्म के दौरान उन्हें क़रीब से जानने का अवसर मिला था! इस फ़िल्म से उन्हें काफ़ी उम्मीद थी! पहला हफ़्ता फ़िल्म नहीं चली तो वे दोबारा प्रमोशन में जुट गए! कोई टीवी चैनल और मीडिया हाउस हमने नहीं छोड़ा! इरफ़ान की मेहनत रंग लाईं और फ़िल्म सुपर हिट हो गई! उस फ़िल्म के बाद उनके साथ अच्छी बॉन्डिंग हो गई थी!
अब बात उस अनकही क़िस्से की... "लंच बॉक्स" फ़िल्म के रिलीज़ के एक हफ़्ते बाद एक बुक लॉंच इवेंट की घटना आज याद आ रही है, जब इरफ़ान ने मेरी क्लास लगा दी थी! मौक़ा था गुजरात के एक आईएएस ऑफ़िसर के बुक लॉंच का! मैं PR देख रहा था! काफ़ी गेस्ट थे पर मीडिया को केवल इरफ़ान खान से मतलब था!
इरफ़ान ने मुझसे कहाँ कि एक इंटर्व्यू दो मिनट से लम्बा नहीं होना चाहिए! इवेंट के अलावा और कुछ नहीं बोलूँगा! प्रिंट मीडिया के कुछ पत्रकारों के साथ उनको बैठा कर दूसरे गेस्ट और अपने क्लाइंट आईएएस अधिकारी का इंटर्व्यू लाइन अप करने चला गया! पाँच -सात मिनट बाद जब वापस आया तो खान साहब ने मेरी ले ली !
इरफ़ान - “यार कहाँ चले गए थे? कोई कुछ भी सवाल कर रहा है! साथ रहो और मेरे इशारे का इंतज़ार करना! एक घंटे में मुझे निकलना है!"
मैंने कहाँ- "सर इंटर्व्यू दो घंटे का लाइन अप है, एक घंटा में नहीं हो पाएगा"
इरफ़ान का जवाब था-" मीडिया वाले तुम्हारे कपड़े फाड़ेंगे, मेरे नहीं! तुम्हारे पास एक घंटा टाइम है!"
ये मेरे लिए पहला मौक़ा था जब एक आर्टिस्ट बार-बार ऊँगल कर रहा था! अमूमन आर्टिस्ट के मैनेजर इस तरह की बात करते है! इंटर्व्यू का T-20 चल रहा था, बीच-बीच में इरफ़ान सर मुझे टाइम याद दिलाते रहे!
मज़े की बात अब सुनिए! तय टाइम से कम समय में इंटर्व्यू ख़त्म किया! इवेंट पीवीआर गोल्ड लाउंज, साकेत में चल रहा था! इरफ़ान ने कहाँ - "पता करो कि लंच बॉक्स फ़िल्म किस ओडी में चल रही है! टाइम है मेरे पास, चलकर फ़िल्म देखते है!" मैं उनको देखता रह गया! वे हंस पड़े! न मेरी हंसी रुक रही थी, न उनकी! एक घंटा बोल कर वे तीन घंटा रहे! दरअसल उस दिन इंटर्व्यू का मन नहीं था! उनसे बोला गया था बुक के बारे में बात करने को और मीडिया वाले पर्सनल सवाल कर रहे थे!
फिर क्या था, बाक़ी बचे टाइम में उनके साथ "लंच बॉक्स" देखी! फ़िल्म के बीच में उठ गए और बोले, " चलो अब जाने का टाइम हो गया" ....क्या वाक़ई में उनका टाइम हो गया था ...RIP Sir 🙏

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