Dil Bechara

       दिल बेचारा: शुद्ध देसी रोमांस!

          - ए॰ एम॰ कुणाल

मुकेश छाबड़ा की डेब्यू निर्देशित फ़िल्म और सुशांत सिंह राजपूत, संजना संघी, सैफ अली खान द्वारा अभिनीत "दिल बेचारा" कैंसर पीड़ित दो लोगों की कहानी है। जिसमें एक हंसमुख और बिंदास लड़का है, जो एक कैंसर पीड़ित लड़की के लिए नई रोशनी बनकर आता है।यह फ़िल्म डिज्नी हॉटस्टार पर रिलीज हो चुकी है।  फॉक्स स्टार स्टूडियो और डिज्नी हॉटस्टार ने इस फिल्म को सभी दर्शकों के लिए फ्री कर रखा है। दिल बेचारा फ़िल्म के लिए हॉटस्टार पर किसी तरह का सब्सक्रिप्शन नहीं लेना होगा।

अमेरिकी उपन्यासकार जॉन ग्रीन के फेमस नोवेल "द फ़ॉल्ट इन अवर स्टार्स" पर मुकेश छाबड़ा ने शुद्ध देसी अन्दाज़ में "दिल बेचारा" बनाया है। इससे पहले इस कहानी पर हॉलीवुड फिल्म 'द फॉल्ट इन आर स्टार्स' के नाम से बन चुकी है। इसके बावजूद दिल बेचारा इस साल की सबसे प्रतीक्षित फ़िल्म है, जिसका दर्शकों को बेसब्री से इंतजार था।

जो लोग जोश बुने की फिल्म 'द फॉल्ट इन आर स्टार्स' देख चुके है, उन्हें इस शुद्ध देसी फ़िल्म में कई ख़ामियां नज़र आएगी पर कई फ़िल्में आलोचना से परे होती है। सुशांत को आखिरी बार देखने के लिए उनके फ़ैन्स के इक्सायट्मेंट्स के आगे फ़िल्म का कोई रिव्यू मायने नहीं रखता है। 

जमशेदपुर जैसे छोटे शहर से पैरिस तक की कहानी को फ़िल्म के निर्देशक ने बेहद खूबसूरत तरीके से पेश किया है।फ़िल्म "दिल बेचारा" जमशेदपुर में रहने वाली किज़ी बासु (संजना संघी) और एमैनुएल राजकुमार जूनियर उर्फ़ मैनी  (सुशांत सिंह राजपूत) की कहानी है, जिसमें किज़ी कैंसर से जूझ रही होती है और मैनी उसकी जिंदगी में खुशी बनकर आता है।उसे हंसने और जीने की वजह देता है।

इस फिल्म की कहानी किजी और मैनी के इर्द-गिर्द घूमती है। पहले फिल्म के  लीड कैरेक्टर्स के नाम पर फिल्म का टाइटल रखा गया था पर बाद में बदल दिया गया। फ़िल्म की नायिका किज़ी (संजना संघी) को थायराइड कैंसर है। उसे लगातार ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ रहना पड़ता है। किज़ी की बेस्ट फ़्रेंड उसकी माँ (स्वास्तिका मुखर्जी) है। उसकी छोटी सी दुनिया एक दिन बड़ी हो जाती है जब मैनी (सुशांत सिंह ) उसकी ज़िंदगी में आ जाता है। 

मैनी और उसका दोस्त जे॰पी॰ (साहिल वैद) के आ जाने से किज़ी  को जीने का मक़सद मिल जाता है। घर में बंद रहने वाली किज़ी खुल कर जीने लगती है। मैनी का दोस्त जेपी (साहिल वैद) को आँखों का कैंसर होता है। कैंसर के कारण जेपी दोनों आंखों की रोशनी खो देता है। इसके बावजूद जेपी फ़िल्म बनाना चाहता है। उसके सपने को पूरा करने में मैनी और किज़ी साथ देते है।

किज़ी बचपन से अभिमन्यु वीर (सैफ अली खान) की बहुत बड़ी फ़ैन है, जो पैरिस में रहता है। बीमार होने के बावजूद किज़ी उससे एक बार मिलना चाहती है। वह जानना चाहती है कि अभिमन्यु वीर ने अपना आख़री गाना  "मैं तुम्हारा...", अधूरा क्यों छोड़ देता है। किज़ी के माता-पिता के लाख मना करने के बावजूद मैनी उसे पैरिस ले जाता है। किज़ी की माँ भी साथ जाती है। वे किज़ी की आख़िरी ख्वाहिश को पूरा करते है। अपने हीरो अभिमन्यु वीर के व्यवहार से किज़ी बहुत आहत होती है। वे वापस आ जाते है और अंत में मैनी उस अधूरे गाने को पूरा करता है। इस बीच मैनी की बीमारी गंभीर रूप ले लेती है और दूसरों को जीना सिखाने वाला खुद जीना भूल जाता है। फ़िल्म के अंत में कौन किसका साथ छोड़ता है, यह जानने के लिए इस पंच लाइन के साथ छोड़ रहा हूँ-एक था राजा, एक थी रानी, कोई एक बिछड़ा तो दोनों की खत्म कहानी...

सुशांत सिंह राजपूत की आख़िरी फिल्म दिल बेचारा एक इमोशनल फ़िल्म है, जिससे युवा काफी जुड़ाव महसूस करेंगे। सुशांत सिंह राजपूत जाते-जाते अपनी छाप छोड़ जाते है। दर्शकों को कभी जोकर बन कर हंसाते है, तो कभी ट्रेज़डी किंग बन कर रुलाते है। पर उनकी हंसी में भी वह दर्द है, जो दर्शकों को रूलाता है। दिल बेचारा सुशांत के लिए दूसरी "काई पो चे" साबित होती पर बॉलीवुड का ध्रुव तारा सुशांत को कुछ और ही मंज़ूर था।

सुशांत के अलावा संजना संघी का काम काफ़ी अच्छा है। रॉकस्टार, हिंदी मीडियम और फुकरे रिटर्न जैसी फिल्मों में सपोर्टिंग ऐक्टर का रोल निभा चुकी संजना के लिए दिल बेचारा पहली लीड फ़िल्म हैं। इससे पहले फ‍िल्‍म रॉकस्टार में नरगिस फाखरी की छोटी बहन की भूमिका में संजना के काम को काफ़ी सराहा गया था। 
गेस्ट कलाकार के तौर पे सैफ़ अली खान अपनी छाप छोड़ने में सफल रहे है। फिल्म के बाकी कलाकारों में जे॰पी॰ उर्फ़ साहिल वैद और 
मिस बसु के किरदार में स्वास्तिका मुखर्जी का काम अच्छा है। 

इस फ़िल्म के साथ डेब्यू करने वाले मुकेश छाबड़ा का निर्देशन प्रभावशाली है। भावनात्मक दृश्यों को काफ़ी अच्छे से फ़िल्माया गया है, जो इस फ़िल्म की जान है। इस फिल्म का स्क्रीनप्ले शशांक खेतान और सुप्रतिम सेनगुप्ता के साथ मिलकर लिखा है। जमशेदपुर और पैरिस में शूट की गई फिल्म कई मायनों में खास है। इस फ़िल्म के लिए एआर रहमान ने ख़ास तौर से म्यूजिक तैयार किया है। ए.आर. रहमान का संगीत हमेशा की तरह काफी अच्छा है। फ़िल्म का शीर्षक गीत ए.आर. रहमान ने गाया है। अमिताभ भट्टाचार्य ने गीत लीक से हट कर लिखा है। "दिल बेचारा" और "मैं तुम्हारा" हिट नंबर है। गीतकार अमिताभ भट्टाचार्य और रहमान के संगीत को सुशांत सिंह राजपूत के लिए म्यूजिकल ट्रिब्यूट कहना ग़लत न होगा।

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