सौ सुनार की एक लोहार की
सौ सुनार की एक लोहार की !
-अरुण कुणाल
कर्नाटक चुनाव के वादों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की तीखी आलोचना के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। शुक्रवार को खड़गे ने भाजपा पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया और एनडीए की हाल ही में घोषित 100-दिवसीय योजना को 'सस्ता पीआर स्टंट' करार दिया। खड़गे ने कहा कि भाजपा ने जनता के हितों को नजरअंदाज किया है और यह योजना सिर्फ दिखावा है, जिसमें वास्तविकता और ठोस कार्यों का अभाव है।
प्रधानमंत्री मोदी की ओर से कांग्रेस के चुनावी वादों को लेकर की गई टिप्पणी के जवाब में खड़गे ने भाजपा पर कई मुद्दों पर सवाल उठाए! सोशल पर मीडिया पर उनके द्वारा किया गया ट्वीट -
पीएम मोदी,
झूठ, धोखा, फरेब, लूट और प्रचार वे पाँच विशेषण हैं जो आपकी सरकार का सबसे अच्छा वर्णन करते हैं!
आपका 100-दिन की योजना के बारे में ढोल पीटना एक सस्ता पीआर स्टंट था!
16 मई 2024 को आपने दावा किया था कि आपने 2047 के रोडमैप के लिए 20 लाख से अधिक लोगों से इनपुट लिए थे। पीएमओ में दायर आरटीआई ने इसके बारे में जानकारी देने से इनकार कर दिया, जिससे आपके झूठ उजागर हुए!
बीजेपी में 'बी' का मतलब 'विश्वासघात' है, जबकि 'जे' का मतलब 'जुमला' है! रिकॉर्ड को सीधा करते हुए —
1. प्रति वर्ष 2 करोड़ नौकरियों का वादा?
तो भारत की बेरोजगारी दर 45 सालों के उच्चतम स्तर पर क्यों है? मुट्ठी भर नौकरियों के लिए हर जगह भगदड़ क्यों मचती है? 7 वर्षों में 70 पेपर लीक के लिए कौन जिम्मेदार है? पीएसयू में हिस्सेदारी बेचकर 5 लाख सरकारी नौकरियां किसने छीनीं?
2. बहुत हुई महंगाई की मार?
घरेलू बचत 50 साल के निचले स्तर पर क्यों पहुंच गई? सिर्फ पिछले साल में एक सामान्य थाली की कीमत में 52% की बढ़ोतरी क्यों हुई? टमाटर के दाम में 247%, आलू में 180% और प्याज में 60% की बढ़ोतरी क्यों हुई? दूध, दही, आटा, दाल जैसे आवश्यक खाद्य पदार्थों पर जीएसटी किसने लगाया? एलटीसीजी के जरिए टैक्स टेररिज्म के जरिए मध्यम वर्ग पर जुर्माना कौन लगा रहा है?
3. अच्छे दिन कहां गए?
रुपया अपने सबसे निचले स्तर पर है। क्या यह आईसीयू में है या मार्गदर्शक मंडल में? आपकी सरकार ने पिछले 10 वर्षों में 150 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लिया है, जो हर भारतीय पर 1.5 लाख का कर्ज है। डेमो + त्रुटिपूर्ण जीएसटी के कारण एमएसएमई नष्ट हो गए हैं।
आर्थिक असमानता 100 साल के उच्चतम स्तर पर है। इस खोई हुई दशक में औसत विकास दर 6% से कम है, जबकि यूपीए के दौरान यह 8% थी। निजी निवेश 20 साल के निचले स्तर पर है, जबकि पिछले दशक में विनिर्माण में औसत वृद्धि मात्र 3.1% है, जबकि कांग्रेस-यूपीए के दौरान यह 7.85 थी, 'मेक इन इंडिया' के ऊँचे दावों को विफल कर रहा है!
4. विकसित भारत का क्या हुआ?
आपके द्वारा दावा किए गए सभी निर्माण ताश के पत्तों की तरह ढह रहे हैं — आपके द्वारा उद्घाटन की गई महाराष्ट्र की शिवाजी प्रतिमा, दिल्ली हवाई अड्डे की छत, अयोध्या में राम मंदिर में दरारें और अटल सेतु में दरारें पड़ रही हैं। गुजरात (मोरबी) में पुल गिरते हैं, जबकि बिहार में नए पुल गिरना आम बात हो गई है! अनगिनत रेलवे दुर्घटनाएँ हुई हैं, जबकि मंत्री केवल रील पीआर में व्यस्त हैं!
5. क्या हुआ 'ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा' का?
हमारे पास आपके लिए केवल दो शब्द हैं — मोदी-अडानी मेगा स्कैम और सेबी चेयरपर्सन। असंवैधानिक इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से वसूली द्वारा लूटना बीजेपी का सबसे बड़ा वित्तीय अपराध है। नीरव मोदी, मेहुल चौकसी, विजय माल्या आदि हजारों करोड़ों की लूट के बाद भागने में सक्षम हो गए!
6. क्या हुआ 'मैं देश नहीं झुकने दूंगा' का?
वैश्विक भूख सूचकांक में भारत की रैंक 105 (2024) है, जबकि संयुक्त राष्ट्र मानव विकास सूचकांक में इसकी रैंक 134 है और वैश्विक लैंगिक अंतर सूचकांक में यह 129 पर है।
गलवान के बाद चीन को क्लीन चिट देना, चीनी निवेश के लिए रेड कार्पेट बिछाना और हर पड़ोसी देश के साथ संबंधों को बर्बाद करना।
7. क्या हुआ 'सबका साथ, सबका विकास' और 'जय किसान, जय जवान' का?
अनुसूचित जातियों के खिलाफ अपराधों में 46% की वृद्धि, जबकि अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ अपराधों में 48% की वृद्धि। 2014 की तुलना में 2022 में अनुसूचित जाति/जनजाति की महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों में 1.7 गुना वृद्धि हुई। (एनसीआरबी)
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस समुदायों से सरकारी नौकरियां छीनते हुए 91% कैजुअल/ठेका नियुक्ति में वृद्धि।
2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का जुमला। एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी देने से इनकार। 35 कृषि वस्तुओं पर जीएसटी। अग्निपथ के माध्यम से सशस्त्र बलों में स्थायी भर्ती को अस्थायी बनाना!
मोदी जी, उंगली उठाने से पहले ध्यान दें कि —
मोदी की गारंटी 140 करोड़ भारतीयों के लिए एक क्रूर मजाक है।
- मल्लिकार्जुन खड़गे
गौरतलब हैँ कि खड़गे जी के जवाब के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना ट्वीट हटा लिया, जिससे यह मुद्दा और अधिक चर्चा का विषय बन गया। खड़गे की ओर से भाजपा की 100-दिवसीय योजना को 'सस्ता पीआर स्टंट' बताने और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने के बाद, इस कदम को कई लोगों ने भाजपा की ओर से आत्मरक्षा या दबाव में उठाया गया कदम माना है। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है, जिसमें भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी और बढ़ सकती है।

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