आज से जेफ़री एपस्टीन का साढ़े-साती शुरू: अमेरिका से भारत तक राजनीति के पंडितों का जाप!
आज से जेफ़री एपस्टीन का साढ़े-साती शुरू: अमेरिका से भारत तक राजनीति के पंडितों का जाप!
ले o - अरुण कुणाल
अमेरिका के लिए आज रात और भारत के लिए कल सुबह—जेफ़री एपस्टीन का साढ़े-साती शुरू हो रहा है। यह कोई ज्योतिषीय मुहावरा भर नहीं, बल्कि सत्ता के गलियारों में छिपे उस अंधेरे का संकेत है, जिसे दशकों तक ताक़त, पैसे और प्रभाव के पर्दों से ढका गया। दिवंगत लेकिन दोषी ठहराए जा चुके यौन अपराधी जेफ़री एपस्टीन से जुड़ी अनक्लासिफ़ाइड फाइलें सार्वजनिक होने जा रही हैं और उससे ठीक पहले दर्जनों नई तस्वीरों का सामने आना इस तूफान की आहट है।
एपस्टीन फ़ाइल्स के काउंटडाउन ने सत्ता, सिनेमा और सेलेब्रिटी गलियारों में ऐसा सन्नाटा पैदा किया है कि दिल की धड़कन नाड़ी से नहीं, मीडिया के ब्रेकिंग न्यूज़ से मापी जा रही है। नेता हों या अभिनेता, बड़े कारोबारी हों या क्रिकेट के ‘रोल मॉडल’—सबकी बेचैनी एक जैसी है, फर्क सिर्फ़ इतना है कि कोई PR एजेंसी के दरवाज़े खटखटा रहा है, तो कोई कानूनी टीम को देर रात तक जगाए बैठा है। कल सुबह का अख़बार बताएगा किसकी धड़कन हेडलाइन बनी और किसकी फ़ाइल अभी “सूत्रों के हवाले” सुरक्षित है। आज रात बस दो तरह की नींद होगी—एक वो, जिन्हें सच से डर नहीं और दूसरी, जिन्हें सुबह के पहले पन्ने से डर लगता है।
कल रात जारी की गई 68 नई तस्वीरें उन लगभग 95,000 तस्वीरों का हिस्सा हैं, जिन्हें एपस्टीन की एस्टेट ने अमेरिकी हाउस ओवरसाइट कमेटी को सौंपा है। इससे पहले डेमोक्रेट सदस्यों द्वारा 19 तस्वीरें सार्वजनिक की गई थीं, जिनमें अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कुछ तस्वीरें भी थीं। ट्रंप ने इन्हें “कोई बड़ी बात नहीं” कहकर खारिज किया, लेकिन राजनीति में तस्वीरें अक्सर शब्दों से ज़्यादा बोलती हैं।
नई तस्वीरों में माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स, प्रख्यात भाषाविद् और राजनीतिक विचारक नोम चॉम्स्की, और ट्रंप के पूर्व सहयोगी स्टीव बैनन जैसे नाम सामने आए हैं। ये तस्वीरें किसी को अपराधी सिद्ध नहीं करतीं, लेकिन यह ज़रूर बताती हैं कि एपस्टीन सिर्फ़ एक अकेला अपराधी नहीं था, वह सत्ता, धन और वैश्विक प्रभाव का संगम था।
अब असली परीक्षा अमेरिकी न्याय विभाग की है। फाइलें सार्वजनिक करने के बाद सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि किन दस्तावेज़ों को आंशिक या पूर्ण रूप से काला किया गया है और क्यों। साथ ही यह भी बताना अनिवार्य होगा कि किस तरह की सामग्री जनता के सामने रखी गई और किसे “राष्ट्रीय सुरक्षा” या “जांच प्रक्रिया” के नाम पर रोका गया। कानून के मुताबिक, इन सभी बिंदुओं पर 15 दिनों के भीतर सार्वजनिक स्पष्टीकरण देना होगा।
हाउस ओवरसाइट कमेटी को अब तक एपस्टीन से जुड़े बैंकों के रिकॉर्ड भी मिले हैं, हालांकि वे अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। यही रिकॉर्ड इस पूरे नेटवर्क की आर्थिक रीढ़ को उजागर कर सकते हैं—कौन पैसा देता था, कौन लेता था और किसके लिए?
यह भी ध्यान देने योग्य है कि पिछले लगभग 20 वर्षों में एपस्टीन से जुड़े हजारों दस्तावेज़ पहले ही दीवानी मुकदमों और सूचना के अधिकार के तहत सामने आ चुके हैं। ऐसे में सवाल उठता है, क्या इस बार सचमुच कुछ नया सामने आएगा, या फिर वही पुरानी फ़ाइलों को नए आवरण में पेश किया जाएगा?
एपस्टीन के मैनहैटन स्थित घर से FBI को हजारों नग्न और अर्धनग्न युवतियों की तस्वीरें मिली थीं। स्पष्ट कर दिया गया है कि ये तस्वीरें सार्वजनिक नहीं होंगी। यह निर्णय क़ानूनी तौर पर भले सही हो, लेकिन इससे संदेह भी जन्म लेता है कि कहीं इसी गोपनीयता की आड़ में प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश तो नहीं की जा रही।
अब तक जिन नौ बड़ी हस्तियों के नाम सामने आए हैं, उनमें डोनाल्ड ट्रंप, बिल क्लिंटन, बिल गेट्स, ब्रिटिश शाही परिवार के सदस्य प्रिंस एंड्रयू, स्टीव बैनन, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के पूर्व अध्यक्ष लैरी समर्स, फिल्म निर्माता वुडी एलन, उद्योगपति रिचर्ड ब्रैनसन और प्रसिद्ध वकील एलन डर्शोविट्ज शामिल हैं। इन नामों की मौजूदगी ही बताती है कि एपस्टीन का नेटवर्क कितनी ऊंचाई तक फैला हुआ था।
इन फाइलों में कुछ ऐसी सामग्री भी है, जो इस नेटवर्क की भयावहता को उजागर करती है। एक यूक्रेनी महिला के पासपोर्ट की तस्वीर, जिसमें पहचान संबंधी विवरण काला कर छिपाया गया है। एक अन्य स्क्रीनशॉट में अज्ञात प्रेषक के संदेश हैं, जिनमें रूस की एक 18 वर्षीय लड़की का ज़िक्र और “प्रति लड़की 1000 डॉलर” की मांग का उल्लेख है। ये विवरण सीधे तौर पर मानव तस्करी और संगठित शोषण की ओर इशारा करते हैं।
एक तस्वीर में बिल गेट्स एक अज्ञात महिला के साथ दिखाई देते हैं, जिसका चेहरा छिपाया गया है। वहीं दूसरी तस्वीर में एपस्टीन, नोम चॉम्स्की के साथ एक विमान में नज़र आते हैं। गेट्स पहले ही स्वीकार कर चुके हैं कि उन्होंने परोपकारी उद्देश्यों के लिए संपर्क और चंदा जुटाने के नाम पर एपस्टीन के साथ समय बिताया, जिसे उन्होंने बाद में “एक बड़ी गलती” कहा। लेकिन सवाल यह है कि क्या इतनी “बड़ी गलती” सिर्फ़ नैतिक भूल थी, या उससे कहीं ज़्यादा?
इस पूरे घटनाक्रम का असर सिर्फ़ अमेरिका तक सीमित नहीं है। आज भारत में संसद सत्र का आख़िरी दिन है और आज ही एपस्टीन फाइल्स का खुलासा होना है। कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाली सूचियों में किसी भारतीय नेता, राजनयिक या उद्योगपति का नाम सामने आ सकता है। यदि ऐसा हुआ तो वह नाम मात्र संदर्भ के तौर पर ही क्यों न हो, भारत की राजनीति में भी भूचाल आना तय है।
जेफ़री एपस्टीन की कहानी दरअसल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस वैश्विक व्यवस्था की कहानी है जहां सत्ता अक्सर जवाबदेही से ऊपर मानी जाती है। सवाल यह नहीं है कि कौन तस्वीर में दिखा, बल्कि यह है कि क्या इस बार सच पूरी तरह सामने आएगा या फिर 'शनि की साढ़े साती' की तरह यह संकट भी कुछ समय बाद टल जाएगा, और सिस्टम फिर से खुद को बचा लेगा?

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