Nehru calling Nehru

                    लद्दाख़: नेहरू कॉलिंग नेहरू!

                                       -ए॰ एम॰ कुणाल

पहले डोकलाम और अब लद्दाख़! कब तक इंच-इंच पीछे हटते रहेंगे? कब तक पंडित नेहरू के कंधे पर बंदूक़ रख कर चलाते रहेंगे? नेहरू से इतिहास सवाल करेगा और उसे करना भी चाहिए। वर्तमान हर बात के लिए सरदार पटेल की अदालत में नेहरू को कठघरे में क्यों खड़ा कर रहा है?

गलवान घाटी के खूनी संघर्ष ने एक बार फिर से भारत-चीन विवाद के जीन को बोतल से बाहर निकाल दिया है। हालांकि दोनों देशों की सरकारें बोतल के ऊपर कॉर्क लगाने की कोशिश में है। जबकि व्हात्सप्प यूनिवर्सिटी के लोग नेहरू को आपकी अदालत के लिए समन भेजने की तैयारी कर रहे है। व्हात्सप्प यूनिवर्सिटी के छात्रों के जानकारी के लिए बता दूँ, "गलवान वैली" को पंडित नेहरू ने अपने हाथ से जाने नहीं दिया था। ये वैली 1962 से भारत के कब्जे में है।

गलवान घाटी मामले में भारतीय आर्मी का कहना है कि भारत-चीन सीमा पर सोमवार की रात दोनों देशों की सेना में ज़ोरदार संघर्ष हुआ है जिसमें सेना के एक अधिकारी और दो सैनिकों की मौत हो गई है। जबकि गलवान घाटी में हुई झड़प के लिए चीन भारत पर आरोप लगा रहा।

यह याद रखना चाहिए कि जब अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-चीन सीमा विवाद सुलझाने में मध्यस्थता की पेशकश की तब चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने किसी तीसरे पक्ष की दखलंदाज़ी से साफ़ इंकार कर दिया था और आपसी बातचीत ज़रिये मुद्दों को सुलझाने पर ज़ोर दिया।


इंडियन मीडिया की तरह चीनी मीडिया में सही जानकारी नहीं दी जा रही है। हालांकि चीन के सरकारी अख़बार 'ग्लोबल टाइम्स' बराबर एक तरफ़ा ख़बर छाप रहा है। हाल ही में उसने लिखा था, "भारत को दुश्मन बनाने की हमारे पास कोई वजह नहीं है. लेकिन चीन अपनी ज़मीन का एक इंच भी नहीं छोड़ेगा।" इसके अलावा बार-बार भारत पर दबाव बनाया जा रहा है कि सीमा विवाद के लिए अमरीका की तरफ़ देखने के बजाय चीन से बात करने में ही भलाई है।

ग़ौरतलब है कि इसके पहले चीन ने 2013 में डेपसांग, 2014 में चुमुर और 2017 में डोकलाम में सीमा विवाद को तूल  दिया था लेकिन गालवान घाटी की तरह खूनी संघर्ष नहीं हुआ था।

अब देखना होगा कि लद्दाख़ की तस्वीर बदलने के लिए सैन्य कार्यवाई होती है या पीआर इवेंट का सहारा लिया जाता है। नेहरू को कोसने के अलावा अगला कदम क्या होगा-दिल्ली में झूला या बीजिंग में बिना अजेंडा विज़िट या फिर चीन की कंपनी को नेहरू का स्टैच्यू बनाने का टेंडर दिया जाएगा...?

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