Rasbhari

           ओ रसभरी कल फिर आना...

                       -ए॰ एम॰ कुणाल

रसभरी के टेलर को लेकर स्वरा भास्कर और उनके पिता के ट्वीट को लेकर ट्रोल आर्मी की ट्रोलिंग के बीच अमज़न  प्राइम वीडिओ पर वेब सीरीज़ "रसभरी" रिलीज़ हो गई है। स्वरा के फ़ैन को ये जानकर ख़ुशी होगी कि ट्रोल आर्मी के लोग जो अश्लीलता सोशल मीडिया पर  फैला रहे है, उसका 5% भी इस वेब सीरीज़ में नहीं है।

ये वेब सीरीज़ स्वरा भास्कर की  "अनारकली" और श्रद्धा कपूर की "स्त्री" का कॉक्टेल है। स्त्री का फ़ेमस लाइन था,  "ओ स्त्री कल आना" और रसभरी को देख कर दर्शक कहेंगे "ओ रसभरी कल फिर आना!" आठ एपिसोड में बनी इस वेब सीरीज़ में भूत वाला एंगल भी है पर रसभरी से दर्शकों को डर नहीं लगेगा बल्कि प्यार हो जाएगा। हालांकि वेब सीरीज़ का नाम "रसभरी" है पर कहानी इंगलिश टीचर शानू बंसल और उसके स्टूडेंट
नंद (आयुष्मान सक्सेना) की है।

स्वरा भास्कर ने इंग्लिश टीचर के अलावा 1857 के जमाने की एक तवायफ़ रसभरी का रोल निभाया। निखिल नागेश भट्ट के निर्देशन में बनी इस सीरीज की कहानी एक टीनेज लड़के के बारे में है जो अपनी टीचर के उपर फिदा है और पूरा मेरठ शहर उस टीचर के अंदर बसी मशहूर तवायफ़ रसभरी के लिए पागल है।

रसभरी की कहानी यूपी के मेरठ शहर की है, जिसमें नंद  (आयुष्मान सक्सेना)  नाम का एक लड़का अपने स्कूल के दिनों की कहानी सुनाता है। शानू बंसल (स्वरा भास्कर) नंद के स्कूल में ही इंगलिश टीचर बनकर आती है। नंद के साथ-साथ पूरा स्कूल शानू का दीवाना हो जाता है।  इस बीच नंद की स्कूल फ़्रेंड प्रियंका (रश्मि आडगेकर ) भी उसकी ज़िंदगी में आ जाती है। वह नंद से प्यार करने लगती है पर नंद कुछ कहने की हिम्मत नहीं कर पाता, जिससे वह नाराज़ हो जाती है।कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब शानू के अंदर की रसभरी बाहर आती है। दिल फेंक रसभरी के स्वाद का दीवाना मेरठ के सारे मर्द हो जाते है, जिसमें नंद का पिता भी एक है। नंद इंग्लिश सबजेक्ट की कोचिंग के बहाने शानू के घर जाने लगता है। जब उसे पता चलता है कि उसकी टीचर का संबंध शहर के कई लोगों के साथ है, तो एक दिन कोचिंग के समय नंद उसे किस कर बैठता है पर बदले में उसे मिलता है शानू का थप्पड़! नाराज़ होकर वह शानू बंसल के पति को सबकुछ बता देता है। नंद को जानकर आश्चर्य होता है कि शानू के पति को सारी कहानी पता है।वह नंद को बताता है कि रसभरी नाम की एक तवायफ़ का साया उसके उपर है। सच्चाई जानकर नंद अपनी टीचर की इज्जत करने लगता है। इस बीच नंद की मां समेत शहर की दूसरी महिलायें  शानू को शहर से निकालने का प्लान बना लेती है। उनको लगता है कि शानू ने उनके पति और बच्चों को बिगाड़ दिया है।  नंद बड़ी चतुराई से अपनी टीचर को बचाता है। रसभरी का क्लाइमेक्स देखने लायक़ है । दर्शकों का मुँह खुला का खुला रह जाएगा।

एक टीचर और रसभरी के रूप में स्वरा भास्कर ने दोहरे चरित्र को पर्दे पर उतारने में सफल रही है। स्वरा भास्कर का किरदार मेरठ के साथ-साथ पूरे देश को रिझाने वाला है। नंद की तरह दर्शकों को स्वरा के रसभरी वाले किरदार में बार-बार आने का इंतज़ार रहेगा। रसभरी का रस स्वरा भास्कर है पर युवा कलाकार आयुष्मान सक्सेना का भी अच्छा काम है। स्वरा भास्कर जैसे एक मझे हुए कलाकार के साथ स्क्रीन शेयर करते वक़्त आयुष्मान कही भी कम नहीं दिखा। उसके अलावा नीलू कोहली और रश्मि आडगेकर ने छोटा रोल के बावजूद काम अच्छा किया है।

निर्देशक निखिल भट्ट द्वारा शांतनु श्रीवास्तव की एक छोटी और सामान्य सी कहानी पर आठ एपिसोड की वेब सीरीज़ बनाना वाक़ई में क़ाबिले तारीफ़ है। निखिल भट्ट  ने टीचर शानू बंसल और स्टूडेंट नंद के चरित्र के साथ न्याय तो किया है पर रसभरी के किरदार को 8 एपिसोड के बाद भी समझा पाने में असफल रहे है। शायद उनका इरादा रसभरी पार्ट-2 बनाने का हो।

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